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आधुनिक मैथिली गीत-संगीतक नवारम्भ
किए रहै छी दूर दूर

भाषाक प्रगतिक प्रतिफलन सबसँ पहिने साहित्य आ संगीत मे देखल जाइछ। वर्तमान मे मैथिली भाषा मे विभिन्न तरहक काज भऽ रहल अछि। प्रसन्नताक बात जे समसामयिक संगीतक मादे सेहो सोचल जा रहल अछि। हाले मे बनल किछु मैथिली गीतक एलबम `किए रहै छी दूर दूर` हमरा हाथ आएल अछि। एकर गायक मे राष्ट्रीय स्तरक प्रतिभाक संगहि क्षेत्रीय प्रतिभा सेहो देखल जाइछ। दस गीतक ई अनमोल संकलन कला प्रेमीक लेल एक विशेष भावनात्मक उपहार थिक जे भविष्यक लेल मार्गदर्शक सेहो।

सर्वप्रथम आकर्षित करैछ एकर संगीत जे बहुत दक्षता आ कुशलताक संग सीताराम सिंहजी द्वारा साधल गेल अछि। सर्वाधुनिक डिजिटल रेकॉर्डिंग द्वारा प्रस्तुत एहि एलबमक संगीते मन कें मोहि लेबाक लेल पर्याप्त अछि। मधुरतम स्वर मे गाओल गेल एहि गीत सभ मे मैथिलीक माधुर्य और स्वरक आवेदन यथेष्ट अछि। कलाकार लोकनि मे भूपिन्दर सिंह, उदित नारायण, नन्दिता चक्रवर्ती, रंजना झा आ सीताराम सिंह छथि। गीतकार छथि उदय नारायण सिंह `नचिकेता`। ई एक audio-visual album थिक जकर audio CD-रूप सेहो बजार मे उपलब्ध होएत।

यद्यपि एखन audio CD मात्र हमरा हाथ आएल अछि, किन्तु स्पष्ट छैक जे एहन संगीतक प्रयोग मे दृश्य सम्पादन सेहो चुनौतीपूर्ण होएत। समयक अनुकूल गीतक भाव-स्वभाव प्रौढ़ लोकक संगहि युवा पीढ़ी मे सेहो एकर लोकप्रिय होएबाक स्पष्ट संकेत थिक।

डिजिटल प्रोसेसिंग केर कारणे संगीतक रूप ग्लौमरस होएबाक संगहि वाणिज्यिक दृष्टिएँ सेहो सफल प्रयास अछि। ओना एकरा मात्र वाणिज्यिक संगीत नहि बुझल जेबाक चाही, कारण एकर कलाकार सभ बेस लगन सँ काज कएलनि अछि। English Flute, Harpsicord, Latin American Bossa-Nova क संग तबला, सितार, संतुरक संतुलित उपयोग संगीतकारक प्रतिभा कें प्रमाणित करैछ। आवह संगीत (background music) बेस मनोयोगक संग तौयार कएल गेल अछि।

पहिल गीत छै – `गली गली मे गीत गबौ छी` मे दोहरा ढोलकक प्रयोग `बिहारीपन`क संकेत दैछ। संग मे पियानो एकर्डियनक व्यवहार बेस सार्थक अछि। डिजाइनर ड्रेस सन डिजाइनर सिन्थेसाइज्ड म्यूजिक शेष तक मोन कें मोहित करैछ। गायिका छथि नन्दिता चक्रवर्ती आ रंजना झा।

दोसर गीत `हमर अकास मे एखनहुँ चानक छाया छै` – ई गीत आजुक पीढि़क संग हँसमुख अछि। सेक्सोफोन, बास गिटार आ सिन्थेसाइजरक सहायता सँ एक हैप्पी अरबन आउटलुक प्रस्तुत करैत अछि। गीतक गति मे डबल आर हाफ टेम्पो रॉक म्यूजिकक आभास भेटैछ। मैथिली भाषी नहि होइतहुँ भूपिन्दर सिंह गीत कें सही रूप मे गौलनि अछि।

तेसर गीत `रिमझिम रिमझिम ता धिन धिने` एकदम भारतीय अंदाज मे बरसातक गीत थिक। एहि ट्रैक मे सितार, संतुर एवं तबलाक व्यवहार रिमझिम वर्षाक आभास दैछ। गायक कलाकार छथि रंजना झा आ उदित नारायण।

चारिम गीत हमरा जनौत जे सभ गीत कें बहुत पाछू छोडि़ दैछ। संगीतकार सीताराम सिंहक आवाज मे ई गीत `हम छी बौसल नदी किनारे` अत्यधिक आकर्षक अछि।

पाँचम गीत `प्रीतम प्रीत जँ कएल हमर संग` एक युगल गीत थिक जे भूपिन्दर आ नन्दिता गओलनि अछि। दुनूक स्वर माधुरी आकर्षित करैछ। कतउ-कतउ स्वर मे भारतीयताक आभास अद्भुत अछि आर गीतक बीच इन्टरलूड्स सेहो बेस विलक्षण – गीतक स्केल सँ स्वाधीन भऽ अपन बाट बनबौत।

किन्तु जँ हिट गीतक बात करी तऽ से थिक छठम ट्रैक। पाश्चात्य संगीतक रॉक-एन-रोल आ 6-बार ब्लूज सँ प्रभावित `बाज रे माली` मे कोरस इफेक्ट्स आर बास गिटारक व्यवहार एवं सेक्सोफोनक लहराइत इन्टरलूड्स गीत मे चारि चान लगा दैछ। उदित नारायणक ई गीत आसानी सँ नवीन पीढ़ीक श्रोताक मन जीति सकत।

हम एहि एलबम कें एक गुलदस्ता ओहिना नहि कहैत छी। अलग-अलग गीत मे अलग-अलग सेन्टिमेन्ट्स अछि। पुरिया रागक संग सीताराम सिंहक साउण्ड इफेक्ट एवं सितार, सरोद, बाँसुरी आ संतुरक व्यवहार सातम ट्रैक मे एक फराके पहचान बनबौछ। `पवन गहन अति घोर – राति-राति हम जागल बौसल` गीत मे लौटिन अमेरिकन बोसा-नोभा लयक (rythm) प्रयोग बेस परिपक्व अछि। भरिसक नन्दिता चक्रवर्तीक इएह सर्वोत्तम ट्रैक थिक। प्राच्य आ पाश्चात्य संगीतक एहन एक्सपेरिमेन्ट वा संगम स्वत: एक दृष्टान्त अछि।

आठम गीत `हम नहि जानल छलहुँ नुकाएल` मे तालक व्यवहार करैत समय तबला आर ड्रम्सक आवाज सुनल जाइछ। गीतक समय तबला आर इन्टरलूड म्यूजिक केर व्यवहार अद्भुत अछि। कलाकारक मधुर आवाज सरिपहुँ मोन कें मोहि लौछ। कलाकार छथि रंजना झा।

नवम ट्रैक भूपिन्दर सिंहक एकक गीत थिक जे पाँचम ट्रैक पर डूएटक रूप मे रेकॉर्ड कएल गेल अछि। साधारणत: एक गीतक दू भर्सन नहि सुनल जाइछ, ताहू हिसाबे ई एक यूनीक प्रयोग थिक। आब ई बात श्रोता पर निर्भर अछि जे दुनू मे ओ ककरा पसिन करैत छथि।

दशम आर अंतिम गीत `सबटा कालक छै कराल रस` एक गंभीर रसक गीत थिक जे स्वरक व्यवहार सँ स्पष्ट होइछ। कलाकार छथि उदित नारायण।

समस्त ट्रैक नीक तँ लगबे कएल संगहि मैथिलीक गीत-संगीतक भविष्य केहन होएत तकरो आभास भेटल। जँ ई समस्त गीत मैथिली मे नहि लिखल गेल होइत तऽ भारतक कोनो भाषा मे लिखल जा सकैत छल। समग्रता मे एकर संगीत आजुक आधुनिक, कॉसमोपोलिटन, शहरी समाजक प्रतिबिम्ब थिक।

ओना हमरा बुझि पड़ैछ जे बंगाली वा मराठी स्वरक जेना एक अलग परिचिति छैक, भरिसक एहि एलबमक निर्माणकर्ता लोकनिक मोन मे ओहने मैथिली आधुनिक संगीतक परिचितिक आकांक्षा छनि। यद्यपि एहन सेन्टिमेन्ट शहर केन्द्रित कल्चर मे झपाँ जाइछ तथापि हम मैथिली मे एक स्वतंत्र आधुनिक संगीत परम्पराक अपेक्षा एखनहुँ करब। लोक परम्परा सँ जुड़ल रहबाक आदतिए संभवत: हमर एहि आसक आधार थिक।