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Ram Lochan Thakur

श्री राम लोचन ठाकुरक जन्म 18 मार्च 1949 कें मधुबनी जिलाक बाबूपाली गाम मे भेल छलनि। हुनक प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत टोल पाठशाला मे भेलनि। 1963 मे कलुआही हाइस्कूल सँ मौट्रिक पास कयलाक बाद ओ नोकरीक खोज मे कलकत्ता चल अयलाह। तखन ओ पनरहे बर्खक छलाह। ओही वयस मे जीविका लेल हुनका अनेक धंधा करए पड़लनि।लेकिन प्रतिभाक बल पर बहुत जल्दिए हुनका इनकम टैक्स मे सरकारी नौकरी भेटि गेलनि।

शिक्षाक प्रति जे अनुराग हुनका मे छलनि से चौन नहि लेबऽ देलकनि।स्थायी नौकरीशुरू करिते ओ सांध्यकालीन छात्रक रूप मे चारुचन्द्र कॉलेज मे प्रवेश लेलथि। ओ कलकत्ता विश्वविद्यालयक एहन स्नातक छात्र भेलाह, जिनका मौथिली पढ़बा लेल संघर्ष करएपड़लनि। आयकर विभाग सँ 2009 मे सेवानिवृत्त भेलाक बाद ओ `मिथिला दर्शन`क संपादन कऽ रहल छथि।
राम लोचन ठाकुर जखन छठमे मे पढ़ैत छलाह तखने गीत लिखब शुरू कयलनि। अखनधरि हुनका पाँचटा काव्य संग्रह प्रकाशित भेल छनि : इतिहासहंता (1977), माटि-पानिकगीत (1985), देशक नाम छलौ सोन चिड़ैया (1986), अपूर्वा (1996) एवं लाख प्रश्न अनुत्तरित (2003)।
`बेताल कथा` नामक एकटा हास्य-व्यंग्य कथा-संग्रह कुमारेश काश्यपक छद्म नाम सँ 1981 मे छपल छलनि।
राम लोचन ठाकुरक दू टा संस्मरणात्मक पोथी अयलनि। `स्मृतिक धोखरल रंग` 2004 मे आ `आँखि मुनने : आँखि खोलने` 2005 मे।
1983 आ पुन: 2006 मे ओ `मौथिली लोककथा` छपौलनि जे लोकसाहित्यक पुनर्रचना अछि।
उपर्युक्त नौ टा मौलिक पोथीक अतिरिक्त दू टा संपादित तथा अनुवादक सात टा पोथी प्रकाशित आ कैकटा अप्रकाशित छनि। अनुवाद लेल हुनका प्रतिष्ठित `भाषा भारती सम्मान` सँ अलंकृत कयल गेल छलनि तथा विदेह सम्मान सेहो प्राप्त भेल छनि। अग्रदूतक छद्म नाम सँ राम लोचन अनेक कथा एवं निबंध लिखलनि जे अद्यावधि पत्र-पत्रिका मेछिडि़आयल अछि; पुस्तकाकार प्रकाशित नहि भऽ सकल अछि।
ओ अनेक पोथी आ पत्रिकाक संपादन कऽ चुकल छथि। `अग्निपत्र`, `रंगमंच`, `मौथिली दर्शन` आ `सुल्फा` सन स्तरीय पत्रिकाक ओ यशस्वी संपादक रहल छथि।
राम लोचन ठाकुर मौथिलीक अग्निजीवी काव्यधाराक प्रवर्तक कवि, अभिनेता-निर्देशक एवं कर्मठ भाषा आंदोलनी रहल छथि। ओ मौथिली, हिंदी, बंगला आ अंग्रेजी भाषाकजानकार छथि।
राम लोचन ठाकुर माक्र्सवादी विश्वदृष्टि सँ सम्पन्न रचनाकार छथि। हुनका मिथिला, मौथिली आ मौथिल संस्कृति सँ अगाध प्रेम छनि। ओ मिथिलाक पीड़ा आ आकांक्षाकमार्मिक कवि छथि। व्यंग्य, करुणा, विरोध आ ललकार राम लोचनक प्रमुख काव्य-स्वर थिकनि। हुनक काव्य-शिल्प लोकधर्मी अछि। हुनक साहित्य मे पारंपरिक आ आधुनिक दुनूकाव्य-रूपक अद्भुत मेल अछि। अपन उत्कट लोक-प्रेम आ करुणा लेल राम लोचन मौथिली साहित्य मे स्मरणीय बनल रहताह।
कनिञा काकी
सिकिया के चिरि-चिरि बेड़ा एक बनओलहुँ
सेहे मझधार डुबाए….

खढ़-पात जोहि-जोहि खोंता एक बनओलहुँ
गेल्ह-टेल्ह मोह लपटाय
बीतल उमेरिया, पइरुख थाकल

… आब हमें भेलहुँ बलाय
मनक मनोरथ, मनहि मगन भेल
….आन करइत भेल आने
एक वृद्धाक मर्मांतक कथा

Executive Editor: Mithila Darshan
Ram Lochan Thakur was born on 18th March, 1949 in the village Babupali of Madhubani district. He got his primary education in a Sanskrit Tol School. After matriculation from Kaluahi High School he came to Calcutta in search of job. At the time he was merely fifteen years old. He had to do so many things for his livelihood. But he got a permanent job in the Income Tax Dept. very soon on merit. Longing for education in him did not let him rest. He took admission in Charuchandra College as a evening scholar soon after joining Income Tax Dept. He was the lone student of Calcutta University who has to struggle for studying Maithili. After retiring from Income Tax Dept. in 2009 he is editing ‘Mithila Darshan’.

Ram Lochan started writing lyrics when he was in class six. Till now he has published five collections of poem : Itihashanta (1977), Matipanik geet (1985), Deshak nam chhalai son chiraiya (1986), Apurva (1996) and Lakh Prashna Anuttarit (2003).
A collection of satirical stories titled ‘Betal Katha’ came out in 1981 in the pseudonym of Kumaresh Kashyap.

‘Smritik Dhokharal Rang’ and ‘Aankhi Munne : Aankhi Kholne’ are his two books of memoir which came out respectively in 2004 and 2005.

He Published ‘Maithili Lokakatha’ in 1983 and again in 2006 which is a reconstruction of folklore.
In addition to the above nine original books he published two edited & seven translated works. Many translated works are still lying unpublished.

He got prestigious ‘Bhasha Bharti Samman’ & Videha Samman for translation.
Ram Lochan Thakur published many short stories and essays in various journals in the pseudonym of Agradoot which are waiting to be collected in a book.
He has edited many books and journals. He edited renowned magazines like Agnipatra, Rangmanch, Maithili Darshan and Sulfa.

He has been the pioneer poet of Agnijivi cult of Maithili poetry, an actor-director and a protagonist of language movement for Maithili. He knows Maithili, Hindi, Bengali & English languages.
Ram Lochan Thakur is an author of Marxian worldview. He has profound love for Mithila, Maithili and Maithili culture. He is the poet of the people of Mithila; the poet of their sufferings and dreams. Satire, Pathos, Protest and Challenge are the prominent tones of his poetry.

His poetic craft is very close to the common folk. There is a fine mingling of traditional and modern poetic forms in his poetry. Ram Lochan will ever be remembered in Maithili Literature for his love and pathos for the people. Ram Lochan Ji was awarded the Prabodh Sahitya Samman in 2008 for his life long contribution to Maithili Literature.